MP Guest Teacher News: मध्य प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अस्थायी रूप से सेवाएं दे रहे अतिथि विद्वानों को बड़ी राहत देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य में हरियाणा मॉडल लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे अतिथि विद्वानों का वेतन डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है और उन्हें सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में बने रहने का अवसर मिल सकता है। उच्च शिक्षा विभाग ने इसके लिए सात सदस्यीय समिति गठित की है, जो हरियाणा की व्यवस्था का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें देगी। इस कदम से वर्षों से अस्थिरता झेल रहे हजारों अतिथि विद्वानों को स्थायित्व मिलने की उम्मीद जगी है।
हरियाणा मॉडल से क्या बदलेगा
हरियाणा में यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को बेहतर वेतन और सेवा सुरक्षा दी जा रही है। बताया जा रहा है कि पांच वर्ष का अनुभव रखने वाले यूजीसी पात्र अतिथि विद्वानों को वहां लगभग 57,700 रुपये मासिक वेतन मिलता है और उन्हें सेवानिवृत्ति आयु तक कार्य का अवसर दिया जाता है। यदि यही मॉडल मध्य प्रदेश में लागू होता है तो यहां कार्यरत अतिथि विद्वानों की आय मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी बढ़ जाएगी।
वर्तमान व्यवस्था में सीमित मानदेय
मध्य प्रदेश में अतिथि विद्वानों को अभी 2000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। अवकाश के दिनों का भुगतान नहीं होने के कारण अधिकांश शिक्षकों को 40 से 44 हजार रुपये प्रतिमाह ही मिल पाते हैं। उन्हें सीमित आकस्मिक और ऐच्छिक अवकाश मिलते हैं, जबकि नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति होते ही अतिथि विद्वानों की सेवाएं समाप्त कर दी जाती हैं। इसी असुरक्षा के कारण लंबे समय से बदलाव की मांग उठ रही थी।
यूजीसी पात्र विद्वानों की बड़ी संख्या
एमपी अतिथि विद्वान महासंघ के अनुसार प्रदेश में लगभग 4500 अतिथि विद्वान कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 3700 यूजीसी की योग्यता पूरी करते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। हरियाणा मॉडल लागू होने से इन योग्य शिक्षकों को सम्मानजनक वेतन और भविष्य की सुरक्षा मिल सकती है।
समिति की भूमिका और आगे की राह
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित समिति हरियाणा में लागू सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और स्थायित्व से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर अंतिम निर्णय कैबिनेट स्तर पर लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह फैसला प्रदेश के अतिथि विद्वानों के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सकारात्मक बदलाव साबित हो सकता है।
