MP Employees News: हाइकोर्ट का बड़ा फैसला, नवनियुक्त कर्मचारियों को 100% वेतन मिले

MP Employees News: मध्य प्रदेश के हजारों कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। एमपी हाईकोर्ट ने लंबित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को नवनियुक्त कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन देने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के साथ ही सरकार और अन्य एजेंसियों द्वारा दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया गया है। कोर्ट के इस फैसले से बीते तीन वर्षों से वेतन कटौती झेल रहे कर्मचारियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

हाइकोर्ट का आदेश

नवनियुक्त कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत

पिछले तीन सालों में नियुक्त हुए हजारों कर्मचारियों को वेतन के अलग-अलग स्लैब के चलते पूरा वेतन नहीं मिल पा रहा था। पहले साल 70 प्रतिशत, दूसरे साल 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने की व्यवस्था लागू थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इन कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का अधिकार मिल गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

2019 के नियमों से शुरू हुआ विवाद

दिसंबर 2019 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत परिवीक्षा अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया गया था। इसी के साथ कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन में कटौती का प्रावधान लागू किया गया। वहीं मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से नियुक्त कर्मचारियों को पहले दिन से ही पूरा वेतन दिया जा रहा था। इस असमानता को लेकर कर्मचारियों ने लगातार आपत्ति जताई और न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट की इंदौर पीठ सहित अन्य पीठों में दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस दीपक खोट ने तीन साल की परिवीक्षा अवधि में नियमित कार्य लेने के बावजूद वेतन में कटौती को अतार्किक बताया। कोर्ट ने माना कि समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू होना चाहिए और भर्ती एजेंसी के आधार पर कर्मचारियों में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

फैसले से बदलेगा भविष्य

कर्मचारियों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह निर्णय उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है और इससे आगे सभी नवनियुक्त कर्मचारियों को पूरा वेतन मिलने का रास्ता साफ होगा। यह फैसला न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि सेवा नियमों में समानता और न्याय की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगा।

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