MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के तबादलों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब जैसे ही किसी सरकारी कर्मचारी का तबादला प्रस्तावित होगा, तीन दिन के भीतर उसका आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य वर्षों से चली आ रही फाइलों की देरी, टालमटोल और असमंजस की स्थिति को खत्म करना है, ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बन सके।
तबादला आदेश में तय हुई समय-सीमा
अब तक सरकारी कर्मचारियों के तबादलों से जुड़ी फाइलें महीनों तक दफ्तरों में अटकी रहती थीं। लेकिन नई व्यवस्था के तहत जैसे ही तबादले का प्रस्ताव आएगा, संबंधित विभाग को तीन दिन के भीतर आदेश जारी करना होगा। यदि तय समय में आदेश जारी नहीं होता है, तो देरी का स्पष्ट कारण बताना पड़ेगा और उसकी पूरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजनी होगी।
A+ नोटशीट व्यवस्था में बड़ा बदलाव
मुख्यमंत्री कार्यालय की A+ नोटशीट प्रणाली में भी अहम सुधार किया गया है। अब विभाग प्रमुख, अपर मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव (PS) को समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि फैसले केवल कागजों में न अटकें, बल्कि समय पर लागू हों।
तबादला नीति में दी गई अस्थायी छूट
सरकार ने फिलहाल तबादला नीति के कुछ प्रावधानों को शिथिल कर दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार पहले तबादला आदेश जारी किया जा सकेगा और बाद में औपचारिक अनुमोदन लिया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक निर्णयों में तेजी लाना और कर्मचारियों को अनावश्यक इंतजार से राहत देना है।
कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के लिए तबादलों को लेकर बनी अनिश्चितता खत्म होगी। फाइलों में अटकने की समस्या पर रोक लगेगी और समय पर आदेश मिलने से मानसिक तनाव भी कम होगा। कुल मिलाकर, यह कदम न सिर्फ कर्मचारियों के हित में है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।
