8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए पेंशन से जुड़े नियमों को और स्पष्ट व सख्त किया है। नए निर्देशों का सीधा उद्देश्य यही है कि पेंशनर या फैमिली पेंशनर के निधन के बाद दस्तावेजों को लेकर कोई भ्रम, देरी या मनमानी न हो और साथ ही रिटायरमेंट के बाद पेंशन में बेवजह कटौती या रिकवरी से बुजुर्गों को पूरी सुरक्षा मिल सके। सरकार का यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और पेंशनरों को मानसिक व आर्थिक राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
PPO लौटाने की प्रक्रिया अब होगी तय चैनल से
वित्त मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (CPAO) ने साफ कर दिया है कि किसी पेंशनर या फैमिली पेंशनर की मृत्यु होने पर बैंक को पेंशन भुगतान आदेश (PPO) से जुड़े दस्तावेज केवल CPAO के माध्यम से ही लौटाने होंगे। बैंक का केंद्रीकृत पेंशन प्रसंस्करण केंद्र (CPPC) सीधे वेतन एवं लेखा कार्यालय (PAO) या संबंधित विभाग को दस्तावेज नहीं भेज सकता। इसमें PPO का डिस्बर्सर हिस्सा, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात शामिल हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर बैंकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
यह नियम भले ही औपचारिक लगे, लेकिन इसका लाभ दिवंगत पेंशनरों के परिवारों को मिलेगा। एक ही माध्यम से दस्तावेज लौटने पर कागजात गुम होने या प्रक्रिया अटकने की आशंका कम होगी। शोक की घड़ी में परिवारों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और काम समय पर पूरा हो सकेगा।
पेंशन कटौती पर सरकार की दो टूक
सरकार ने यह भी दोहराया है कि पेंशन या फैमिली पेंशन एक बार तय हो जाने के बाद उसे मनमाने ढंग से घटाया नहीं जा सकता। केवल स्पष्ट क्लेरिकल त्रुटि की स्थिति में ही संशोधन संभव है। यदि दो साल बाद कोई गलती सामने आती है तो पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की अनुमति जरूरी होगी।
रिकवरी में भी पेंशनरों को सुरक्षा
अगर सरकारी गलती से ज्यादा पेंशन मिल गई हो और पेंशनर की कोई भूमिका न हो, तो रिकवरी माफ करने पर विचार किया जाएगा। रिकवरी करनी भी पड़े तो दो महीने का पूर्व नोटिस देना होगा और कटौती किश्तों में ही की जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला पेंशनरों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
